Thursday, November 22, 2018

इलाहाबाद का नाम तो बदल दिया पर इसे भुलाना आसान नहीं

'इलाहाबाद' का नाम अब 'प्रयागराज' हो गया है, घोषित तौर पर भी और आधिकारिक तौर पर भी.

अब जहां-जहां भी 'इलाहाबाद' शब्द है, उसे तुरंत बदल देने की इस क़दर क़वायद हो रही है, जैसे ये डर हो कि किसी कोने से ये लौटकर दोबारा न आ जाए.

लेकिन ये शब्द भी सरकार के पीछे कुछ इस तरह पड़ा है कि इसकी तुलना चूहे-बिल्ली के खेल वाले या फिर तू डाल-डाल, मैं पात-पात वाले मुहावरे से की जा सकती है.

यानी, सरकार इसे जितना ख़त्म करने की कोशिश कर रही है, घूम-फिर कर कहीं न कहीं से ये शब्द फिर सामने आ ही जा रहा है.

और ये एक ऐसे मौक़े पर सरकार की परेशानी का सबब बन रहा है जब वो कुंभ मेले की तैयारियों में लगी है और उससे पहले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में व्यस्त है.

इलाहाबाद का प्रयागराज में नामकरण अब हुआ है लेकिन पहले लोग इन दोनों शहरों को अलग-अलग ही जानते थे, सिवाय प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के.

ऐसा शायद ही कोई हो जिसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुंह से पहले भी कभी 'इलाहाबाद' शब्द सुना हो.

वो इस शहर को प्रयागराज नाम से ही जानते और पुकारते रहे हैं.

पिछले साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ से एक मुलाक़ात में जब मैंने ये सवाल किया कि क्या इलाहाबाद समेत कुछ शहरों के नाम बदलना भी उनके एजेंडे में है और है तो ये कब होगा, तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "जब करेंगे तो सबसे पहले आपको ही बताएंगे."

उनकी इस मुस्कराहट से ऐसा लगा कि शायद उनके एजेंडे में ये अभी नहीं है.

लेकिन कुंभ की तैयारियों के दौरान इलाहाबाद में जब अखाड़ा परिषद ने उनके सामने ये मांग रख दी तो उनसे रहा नहीं गया और फिर उन्होंने वहीं इसकी घोषणा ही कर दी.

स घोषणा के बाद ये तय हो गया कि कुंभ के पहले इलाहाबाद का नाम बदल जाएगा लेकिन इस घोषणा पर अमल अगली ही कैबिनेट बैठक में हो गया.

इलाहाबाद के बाद अयोध्या में भव्य दीपोत्सव के मौक़े पर योगी आदित्यनाथ ने फ़ैज़ाबाद का नाम बदलकर पूरे ज़िले का नाम अयोध्या कर दिया.

पिछले साल भी दीपोत्सव के मौक़े पर उन्होंने फ़ैज़ाबाद और अयोध्या नगर पालिकाओं को मिलाकर अयोध्या नगर निगम बनाने की घोषणा की थी.

सरकार का पीछा
ज़िले का नाम बदलने के बाद भी न तो फ़ैज़ाबाद शब्द ख़त्म हो रहा था और न ही इलाहाबाद.

मंडल यानी कमिश्नरी के नाम अब भी यही थे. आख़िरकार, एक कैबिनेट की बैठक में मंडलों के नाम भी बदल दिए गए.

अब राजस्व इकाई के तौर पर तो फ़ैज़ाबाद शब्द चला गया लेकिन इलाहाबाद शब्द सरकार का पीछा अभी भी नहीं छोड़ रहा है.

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