Tuesday, July 30, 2019

कश्मीर घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती से उथल-पुथल- नज़रिया

पहले से ही अस्थिरता से जूझ रही कश्मीर घाटी में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 10 हज़ार अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के आदेश ने चिताओं को और बढ़ा दिया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के श्रीनगर दौरे के तुरंत बाद यह ऐलान होने से कश्मीर में बेचैनी का माहौल बन गया है.

15 अगस्त तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए यहां पर अतिरिक्त 40 हज़ार अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं. भारत का स्वतंत्रता दिवस भी इसी दिन है.

घाटी में सामान्य तौर पर जितने सुरक्षाबल तैनात रहते हैं, आजकल उससे अधिक सुरक्षाबल यहां पर मौजूद हैं. कई मानव अधिकार संगठनों का आकलन है कि जम्मू-कश्मीर में 7 लाख सैनिक हैं. इनमें सीमा पर तैनात सैनिक भी शामिल हैं.

तर्क दिया जाता है कि कश्मीर घाटी में हर 15 से 25 आदमियों पर एक वर्दीधारी तैनात है. हालांकि, अधिकारी इन आंकड़ों को अतिरंजित बताते हैं.

यहां पर सैनिकों की सटीक संख्या जो भी हो, सैन्य दल-बल की अधिकतर मौजूदगी घाटी में ही है.

कश्मीर घाटी बहुत ज़्यादा सैन्यीकृत नज़र आती है. बहुत कम दूरी पर सैनिकों, बंकरों, बैरिकेड और नाकों की मौजूदगी बताती है कि यहां पर कितने असामान्य रूप से कड़े सुरक्षा इंतज़ाम हैं.

बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती के कारण स्थानीय लोगों में ग़ुस्से और अलगाव की भावना बढ़ती है, जो पहले ही ख़ुद पर बंदिशें महसूस करते हैं.

अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से घाटी में उथल-पुथल और भी बढ़ जाएगी. जिस हड़बड़ी से यह क़दम उठाया गया है, उससे कश्मीरियों के मन में केंद्र सरकार को लेकर संदेह और गहरा गया है.

इन सुरक्षाबलों को हवाई मार्ग या फिर सड़कों के ज़रिये ठिकानों पर भेजा जा चुका है. इनमें सीआरपीएफ़, बीएसएफ़, एसएसबी और आईटीबीपी के जवान शामिल हैं.

सैनिकों की इस तैनाती के अलावा स्थानीय मीडिया में कुछ अपुष्ट बातें सामने आई हैं और दो बातों को लेकर अफ़वाहें भी फैली हुई हैं.

पहला क़यास यह है कि सरकार आर्टिकल 35 ए को हटाना चाहती है जिसके तहत जम्मू और कश्मीर के स्थानीय निवासियों को परिभाषित किया गया है.

दूसरी अफ़वाह सरकारी दिशानिर्देशों से जुड़ी है. कहा जा रहा है कि सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से जारी पत्रों में रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ों को इकट्ठा करने के लिए कहा गया है. इससे संकेत मिल रहे हैं कि सामान्य जीवन लंबे समय के लिए अस्त व्यस्त हो सकता है.

अभी तक इन तीनों मामलों यानी आर्टिकल 35ए के साथ छेड़छाड़, कथित दिशानिर्देशों और सैनिकों की तैनाती को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.

कुछ स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की कि सुरक्षाबलों की यह तैनाती सामान्य रूटीन के तहत की गई है. उनका कहना है कि ये जवान चरणबद्ध ढंग से पहले से तैनात सुरक्षा बलों की जगह लेंगे.

हालांकि, राष्ट्रीय मीडिया की ख़बरों में अज्ञात सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि कश्मीर घाटी में बड़े हमले की ख़ुफ़िया सूचना मिलने के कारण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.

मगर इस मामले में स्पष्टता के अभाव और केंद्र सरकार की चुप्पी ने लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है. इसी कारण सभी राजनीतिक समूहों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है.

यहां तक कि बीजेपी के सहयोगी सज्जाद लोन ने भी केंद्र पर 'राजनीतिक दांव-पेंच' में ज़्यादा दिलचस्पी लेने का आरोप लगाया है.

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